सफलता की कहानी बिहान योजना से लखपति दीदी बनी प्रेम वर्षा
सफलता की कहानी
बिहान योजना से लखपति दीदी बनी प्रेम वर्षा
आर्थिक संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक का तय किया सफर
बिलासपुर न्यूज /जिले के जनपद पंचायत कोटा के ग्राम पंचायत लिटिया (बेडापाठ) की निवासी श्रीमती प्रेम वर्षा की कहानी ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायक उदाहरण है। एक समय था जब उनका परिवार सीमित आय और आर्थिक कठिनाइयों के बीच जीवनयापन कर रहा था। परिवार की आय मुख्यतः कृषि और मजदूरी पर निर्भर थी, जिससे घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति करना भी चुनौतीपूर्ण था। ऐसे समय में उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के बारे में जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन में बदलाव की नई राह दिखाई।
वर्ष 2024 में वे अन्य महिलाओं के साथ मिलकर दीप महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं और समूह की सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाली। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने महुआ लड्डू निर्माण गतिविधि को आजीविका का माध्यम बनाया। प्रारंभ में पूंजी की कमी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन समूह से प्राप्त सीआईएफ के 60 हजार रूपए की राशि की सहायता से उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से उन्होंने अपने कार्य को निरंतर आगे बढ़ाया तथा बाद में ऋण प्राप्त कर व्यवसाय का विस्तार भी किया। समूह से जुड़ने के बाद उनकी कुल वार्षिक आय लगभग 1 लाख 20 हजार रूपये हो गई है। बिहान योजना से आज दीदी प्रेम वर्षा लखपति दीदी बन गई है। महुआ लड्डू निर्माण गतिविधि शुरू करने के बाद उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज वे नियमित रूप से महुआ लड्डू का उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि वे समय पर ऋण की किश्तें भी चुका रही हैं और आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय का संचालन कर रही हैं।
श्रीमती प्रेम वर्षा की सफलता यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक प्रयास और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग किसी भी महिला के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। आज वे अपने क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उनकी उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और समूह की शक्ति के बल पर आर्थिक आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सकती है। उनकी यह यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि अवसर मिलने पर वे न केवल अपने परिवार की स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि समाज में भी एक नई पहचान स्थापित कर सकती हैं।
// रितेश केशरी कि रिपोर्ट बिलासपुर छ ग //





