भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव और सिंधी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक

भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव और सिंधी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक

रायपुर न्यूज / 30 मार्च 2025 को सिंधी समुदाय झूलेलाल जयंती मना गया है, जिसे चेटीचंड के नाम से भी जाना जाता है. यह पर्व भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव और सिंधी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है. कुछ पंचांगों के अनुसार, यह तिथि सोमवार, 31 मार्च को भी मनाई जाएगी,
इस अवसर पर सिंधी समाज विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिनमें शामिल हैं बहिराणा साहिब की पूजा पालकी यात्रा व जल यात्रा भजन-कीर्तन और सत्संग प्रसाद वितरण और शरबत वितरण का आयोजन किया गया,


--------- झूलेलाल कौन हैं? ------- 
झूलेलाल सिंधी समाज के आराध्य देवता माने जाते हैं. उन्हें भगवान वरुण (जल देवता) का अवतार माना जाता है. झूलेलाल जी का जन्म 10वीं शताब्दी में सिंध (अब पाकिस्तान में) हुआ था.
माना जाता है कि जब सिंध के लोगों पर एक अत्याचारी शासक मिर्कशाह ने धार्मिक प्रतिबंध लगाए, तब भगवान वरुण देव ने झूलेलाल के रूप में जन्म लिया और सिंधियों की रक्षा की. उन्होंने धर्म, न्याय और शांति का संदेश दिया, जिससे सिंधी समाज में भाईचारा और प्रेम बना रहा ,

झूलेलाल जी को “उदयचंद,” “अमरलाल” और “दरियालाल” के नामों से भी जाना जाता है. उनका प्रतीक चिन्ह “बहिराणा साहिब” है, जिसमें पानी से भरा कलश, ज्योति, नारियल, फूल और प्रसाद रखा जाता है.

------चेटी चंड क्या है?----- 

चेटी चंड सिंधी समाज का सबसे बड़ा त्योहार है, जिसे सिंधी नववर्ष के रूप में मनाया जाता है. यह भगवान झूलेलाल (वरुण देव के अवतार) के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है.

इस दिन को सिंधी समाज धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक गर्व और सामाजिक एकता के प्रतीक के रूप में मनाता है.इसी शुभ अवसर पर शिवानंद नगर झंडा चौक रायपुर छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में सिन्धी समाज ने चेटीचंड उत्सव बडी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जिसमें प्रमुख रूप से शंकर ट्रेडर्स के शंकर भाई के साथ समाज के सिंधी पूज्य पंचायत एवं झूलेलाल सेवा समिति द्वारा बड़ी धूमधाम से मनाया गया है।